गोविंद
गोविंद बिहार के गाँव से दिल्ली आया — ईंट-बजरी का काम करने। पहली बार शहर — कमरा कहाँ मिले, राशन कार्ड कैसे बदले, बुखार आए तो कौन सा अस्पताल? सब अजनबी। साथी बोले, "खुद देख, कोई मदद नहीं।" रात को अकेले सोते, डर लगता था।
गोविंद ने फ़ोन के सहायक से हिंदी में पूछा — "दिल्ली ओखला में पाँच हज़ार रुपये में कमरा, बिहार का राशन कार्ड यहाँ कैसे लगे, नज़दीकी सरकारी अस्पताल कहाँ?" सहायक ने कदम, कागज़, मदद नंबर — सब साफ़ बताए। अब हर नई परेशानी पर पहले सहायक, फिर किसी भरोसेमंद से पक्का करो!
शहर में काम — पहले हफ़्ते की तैयारी
बेटा, शहर में अकेले मत घबराओ। कमरा, राशन, अस्पताल, रास्ता — सब हिंदी में पूछो, कदम-दर-कदम जवाब मिलेगा। सरकारी काम में कागज़ ज़रूर जाँचो। गाँव की तरह यहाँ भी धीरे-धीरे सब सीख जाते हो।
अपनी हालत साफ़ बताओ
कौन सा शहर, कितना पैसा, कितने लोग — जितना हो सके
साफ़ सवाल पूछो
"पाँच हज़ार में कहाँ कमरा" — धुंधला मत पूछो, बेटा
कागज़ की सूची मँगवाओ
आधार, राशन कार्ड, किराया का लिखा हुआ कागज़
मदद नंबर फ़ोन में सेव करो
104, 181, मज़दूर सहायता नंबर