रामप्रसाद
रामप्रसाद आठ साल से ईंट-बजरी में काम करता है — रोज़ तीन सौ पचास मिलते, बोर्ड पर चार सौ पचास लिखा। श्रमिक कार्ड नहीं, भविष्य निधि का नाम सुना पर समझ नहीं आया। ज़्यादा घंटों का पैसा तीन महीने से नहीं मिला — ठेकेदार "बाद में" कहता रहता है।
सहायक से न्यूनतम मज़दूरी, श्रमिक कार्ड, भविष्य निधि, राज्य बीमा, शिकायत का ढाँचा — सब मिला। श्रम विभाग गए — बारह हज़ार रुपये ज़्यादा घंटों का पैसा वसूले! बेटा, हक जानोगे तो डर कम होगा।
मज़दूर के हक — जानो, माँगो, लो
कम पैसा, बिना कार्ड, बिना सुरक्षा — यह गलत है, बेटा। सहायक बताता है हक क्या हैं, शिकायत कहाँ करें, पत्र कैसे लिखें। सरकारी काम के लिए श्रम विभाग जाओ — वही तुम्हारा साथी है।
अपना काम और राज्य बताओ
दिल्ली, ईंट-बजरी, रोज़ तीन सौ अस्सी मिलते
न्यूनतम मज़दूरी पूछो
तुम्हें कितना मिलना चाहिए — राज्य के हिसाब से
कार्ड और बीमा के कदम पूछो
श्रमिक कार्ड, भविष्य निधि, राज्य बीमा — क्या-क्या मिल सकता
शिकायत पत्र लिखवाओ
हिंदी में, श्रम विभाग के लिए, तारीख और राशि साफ़