प्रधान जी
प्रधान जी अब एआई से सवाल-जवाब अच्छा करते हैं, जानकारी भी देते हैं। पर हर रोज़ वही काम — "रिपोर्ट लिखो", "सूचना बनाओ", "बजट तैयार करो।" रोज़ बीस मिनट सिर्फ एआई को समझाने में लगते। सोचा — "काश एआई को एक बार सब सिखा दूँ, फिर रोज़ खुद करे!"
तीसरा दौर — एआई के चारों ओर पूरा ढाँचा (सिस्टम) बनाओ। प्रधान जी ने एक "पंचायत सहायक" बनाया: भूमिका तय, नियम तय, नमूने दिए, ढाँचा तय। अब बस बोलते हैं "आज की रिपोर्ट" — एआई जानता है क्या करना है, कैसे करना है, किस ढाँचे में।
तीसरा दौर — ढाँचे (सिस्टम) का ज़माना
एक औज़ार और एक कारखाना (फैक्ट्री) में फ़र्क है — औज़ार से एक काम करो, कारखाने में सब अपने-आप चलता है। तीसरा दौर = कारखाना बनाना। तुम एआई को बताते हो: "तुम पंचायत सचिव हो, हमेशा औपचारिक हिंदी, हमेशा तारीख-स्थान ऊपर, हमेशा तीन हिस्से।" अब हर बार सिखाने की ज़रूरत नहीं — एक बार ढाँचा बनाओ, बार-बार इस्तेमाल करो।
औज़ार बनाम कारखाना
हथौड़े से एक कील ठोको = पहला दौर। पूरी ईंट भट्टी बनाओ जहाँ मिट्टी डालो, ईंट निकले = तीसरा दौर। एआई का ढाँचा = भट्टी — एक बार बनाओ, रोज़ इस्तेमाल।
बड़ी कंपनियों में "कस्टम जीपीटी" और "एआई सहायक" बनते हैं — वही तीसरा दौर है। तुम भी बना सकते हो — मुफ्त!
दौर दो बनाम दौर तीन
| हर बार समझाओ | ढाँचा बनाओ |
|---|---|
| बीस मिनट | दो मिनट |
| भूलने का डर | नियम याद रहें |
| अलग-अलग जवाब | हमेशा एक जैसा अच्छा |