हरिश्चंद काका
हरिश्चंद काका और गाँव के बीस किसान — हर कोई अकेले-अकेले मंडी जाता। ठेकेदार बारह सौ रुपये क्विंटल देता, ले या छोड़। एक शाम चौपाल पर बात हुई — "अगर दो सौ क्विंटल गेहूँ एक साथ बेचें तो?" पर किससे बात करें, क्या बोलें, मंडी अच्छी या सीधा खरीदार — किसी को ठीक से नहीं आता था।
हरिश्चंद काका ने एआई से थोक बिक्री की बातचीत, मात्रा जोड़ने की तालिका और मंडी बनाम सीधे खरीदार की तुलना मँगवाई। बीस किसान, एक सौ अस्सी क्विंटल गेहूँ — सीधे खरीदार से तेरह सौ अस्सी रुपये क्विंटल मिले! एक सौ अस्सी रुपये × एक सौ अस्सी = पूरे समूह को बत्तीस हज़ार चार सौ रुपये ऊपर से!
मिलकर बेचो — एआई से सामूहिक बिक्री
सुनो बेटा, अकेला किसान कमज़ोर होता है, मिलकर ताक़त बनती है। एआई बताता है माल कैसे जोड़ें, खरीदार से क्या बोलें, मंडी के भाव से तुलना कैसे करें। छोटा समूह हो या किसान उत्पादक संगठन — दोनों के काम आएगा।
एआई को बोलो — "तुम किसान संगठन की बिक्री सलाहकार हो"
पहले भूमिका साफ़ करो, फिर फसल और मात्रा बताओ
बातचीत का लेख और तुलना मँगवाओ
मंडी भाव बनाम सीधा खरीदार — कौन फायदे में