दादाजी रघुनाथ
रघुनाथ जी बहत्तर साल के हैं — पोते-पोतियाँ शहर में, गाँव में अकेले। फ़ोन मिला पर अक्षर छोटे, बटन दबाने से डर — "गलत दब गया तो पैसा कट जाएगा?" बेटे ने एआई इंस्टॉल किया, होम स्क्रीन पर शॉर्टकट — पर दादाजी ने कभी खोला नहीं। दवा याद रखना, परिवार को फ़ोन — सब मुश्किल।
बेटे ने एक दिन सेटिंग कर दी — अक्षर सबसे बड़े, फिर सिर्फ़ आवाज़ वाला एआई। अब दादाजी माइक दबाते हैं: "आज का दिन कैसा रहेगा? दवा आठ बजे याद दिलाओ।" जवाब सुनते हैं — टाइप नहीं करना। परिवार को कॉल, भजन, खबर — सब आवाज़ से!
बुज़ुर्गों के लिए एआई — आसान, आवाज़ से
भारत में लगभग चौदह करोड़ बुज़ुर्ग हैं — ज़्यादातर गाँव में, डिजिटल दुनिया से दूर। छोटी लिखाई, उलझे हुए ऐप, तकनीक का डर — एआई इन सब का हल है जब फ़ोन सही सेट हो। बड़े अक्षर, आवाज़ से बात, परिवार का सेटअप — ये पहला कदम है।
सेटिंग → प्रदर्शन → अक्षर आकार → सबसे बड़ा
बेटा/बेटी एक बार कर दे
एआई होम स्क्रीन पर शॉर्टकट लगाओ
नाम: मेरी मदद
आवाज़ मोड — माइक दबाओ, हिंदी बोलो
टाइप की ज़रूरत नहीं
परिवार एक हफ़्ते रोज़ दस मिनट सिखाए
धीरे-धीरे, गुस्से के बिना